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July 1, 2022

साहित्य हमेशा राजनीति का मार्गदर्शक रहा है, पर आज बिल्कुल उलट है, यह स्थिति खतरनाक है : डॉ त्रिपाठी

नई दिल्ली/स्टारलोकप्रवाह, बीते शनिवार को छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल के तत्वाधान में प्रसिद्ध लेखक एवं साहित्यिक पत्रिका ककसाड़ के संपादक हरित योद्धा- डॉ राजाराम त्रिपाठी के मुख्य आतिथ्य एवं आचार्य अमरनाथ त्यागी की अध्यक्षता में श्री राजेंद्र पांडेय की तीन पुस्तकों, अतिथि देवो भव (हिंदी) एवं मोर गांव के बिहान एवं महतारी के हाथ (छत्तीसगढ़ी) का विमोचन वृंदावन सभागार सिविल लाइंस, रायपुर में हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती लतिका भावे एवं अंबर शुक्ला ‘अंबरीश’ मंच पर विराजमान थे।
आचार्य अमरनाथ त्यागी ने श्री राजेंद्र पांडेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर बोलते हुए ये पंक्तियां पढ़ीं-
” जहनियत जब किसी की लाजवाब लगती है।
गुफ्तगू उसकी कीमती किताब लगती है ।।
वह लगता है जैसे एक रोशनी का दरिया है–
बेशकीमती शख्सियत एक आफताब लगती है।”
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ राजाराम त्रिपाठी ने सत्य कहने, लिखने और उस पर टिके रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लेखकों को लिखने के साथ ही साथ खूब पढ़ना भी चाहिए। साहित्य तथा साहित्यकार समाज व राजनीति के मार्गदर्शक होने चाहिए, परंतु वर्तमान में इसका बिल्कुल उलटा देखने में आ रहा है, यह स्थिति किसी भी देश, समाज के लिए बहुत ही खतरनाक होती है। लेखन के केंद्र में किसान,आमजन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण आदि जमीनी विषय भी होने चाहिए।
श्री राजेंद्र पांडे ने चुनिंदा कविताओं का पाठ किया। कुछ लाइनें इस प्रकार हैं..
” कैसी हवा लगी है आज मेरे देश को
हम भूल गए खानपान और परिवेश को।”
श्री शीलकांत पाठक ने विमोचित किताब अतिथि देवो भव की समीक्षा इस तरह की..
लगभग हर विषय पर सन्देश देती हुई छंदोबद्ध, गेय कविताये हैं | “ संकल्प “ कविता की ये पंक्तियाँ कहती हैं” जो दीनहीन निर्धन हैं ,मैं उनको गले लगाऊंगा / जब कुछ के तन पर वस्त्र नहीं ,क्यों मखमल पर सोऊंगा / फटी लंगोटी कर धारण ,मैं धरती पुत्र कहाऊँगा “ | सच को अभिव्यक्त करती हुई ये कवितायेँ सामाजिक दस्तावेज बन रही हैं जिससे हम देश समाज की वर्तमान-नब्ज पकड़ सकते हैं।
डॉ मृणालिका ओझा ने ‘मोर गॉंव के बिहान’ (छत्तीसगढ़ी) पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आचार्य राजेन्द्र पाण्डेय जी की रचनाओं में मानवीय रिश्तों के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन होते हैं।
प्रसिद्ध इतिहासविद डॉ राम कुमार बेहार ने महतारी के हाथ (छत्तीसगढ़ी) की समीक्षा करते हुए कहा…
श्री राजेंद्र पांडे की रचना में सच्चाई और गहराई दोनों है। कवि सभी रसों व रंगों में कविता को ढालने की क्षमता रखता है प्रेम प्रकृति पूजा उसके प्रिय विषय हैं।
इस अवसर पर डॉ जे के डागर, लतिका भावे, श्री गोपाल सोलंकी, तेजपाल सोनी, रिकी बिंदास एवं छत्रपाल सिंह बच्छावत ने भी अपनी रचना पढ़ी। मुख्य अतिथि डॉ राजाराम त्रिपाठी के द्वारा देश के किसान आंदोलन विशिष्ट भूमिका निर्वहन हेतु संस्था की ओर से डॉ आचार्य अमरनाथ त्यागी तथा डॉ आचार्य राजेंद्र पांडे के द्वारा सम्मान चिन्ह, शाल तथा श्रीफल देकर विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुनील पांडे ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्री गोपाल सोलंकी ने किया।

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