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November 27, 2021

लक्षचण्डी महायज्ञ में होगा आध्यात्म व विज्ञान का संगम* *वैज्ञानिक करेंगे यज्ञ के प्रभाव का अध्ययन

चंडीगढ़. स्टारलोकप्रवाह, बीडीकौशिक, धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर ‘माँ मोक्ष दायनी गंगाधाम ट्रस्ट’ के तत्वाधान में यज्ञ सम्राट परम आदरणीय श्री हरिओम जी महाराज जी के मार्गदर्शन तथा श्री शंकराचार्य जी, मठाधीशों और महामण्डलेश्वरों के सान्निध्य में विश्वस्तरीय “लक्षचंडी महायज्ञ” का आयोजन 22 अक्टूबर से 01 नवंबर तक तथा दैनिक प्रार्थना 01 सितंबर से 22 अक्टूबर तक थीम पार्क, कुरुक्षेत्र में किया जा रहा है। देश-विदेश के वैज्ञानिक यज्ञ का सामाजिक, आर्थिक, मानसिक प्रभाव का अध्ययन करेंगे। यह जानकारी नई दिल्ली के हरियाणा भवन में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए साऊथ कोरिया के वैज्ञानिक दल के सदस्य प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ राजेश ने दी।

कार्यक्रम के प्रभारी संजीव घारू ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि सनातन वैदिक ज्ञान का जागृत रूप हवन ना केवल आध्यात्मिक विषय है, अपितु उससे कहीं अधिक आज के इस आधुनिक युग में इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अधिक महत्व भी है। यज्ञ तत्त्वों से उत्पन्न ऊर्जा के सम्पर्क में आते ही वायुमण्डल में फैले अनेकों प्रकार के कीटाणु तथा वायरस जो मानव प्रजाति के लिए भयंकर घातक होते हैं वे सहज ही नष्ट हो जाते हैं। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में भी दावा किया गया है कि हवन-यज्ञ से निकलने वाली ऊर्जा तथा शुद्ध वायु वातावरण में मौजूद संक्रमण (बैक्टीरिया) को काफी हद तक कम कर देता है, जिससे संक्रामक रोगों के फैलने में भारी कमी आती है। दवाओं के प्रयोग से व्यक्ति में सीमित प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है किंतु यज्ञ द्वारा उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा हर जगह फैलती है, जिससे न केवल मनुष्य बल्कि सभी जीव जंतुओं, पेड़-पौधों तथा वायुमंडल को भी सुरक्षित किया जा सकता हैं। इसलिए अकाल महामारी से बचने के लिए यज्ञ ही एकमात्र सार्थक उपाय है। उल्लेखनीय है कि हमारे सनातन ऋषियों ने आज उपलब्ध अनेकों साहित्य के माध्यम से यज्ञ के महत्व को बताया, वहीं दूसरी ओर कई वैज्ञानिकों और विद्वानों ने यज्ञ पर शोध किया है तथा इसके महत्व के बारे में कई प्रयोग करके दवाइयाँ बनाई हैं, जिसमें रसायन विज्ञान के फ्रांसीसी वैज्ञानिक प्रो. मैक्स मुलर, डॉ. त्रिले, प्रो. टिलवर्ट, डॉ. टैटलिट, फ्रेंच डॉ. हेफ़किन (चेचक के टीके के आविष्कारक), जर्मन डॉ. माथियास फ़ारिंगर, डॉ. हिरोशी मोटोयामा, श्रीमती मार्गरेट मोरी आदि प्रमुख हैं।

आध्यात्मिक चिंतक साध्वी रेणुका जी ने प्रेसवार्ता में बताया कि भारत तथा विश्व में कोरोना जैसी घातक महामारी के निदान के लिए पहली बार श्रीमद्भागवत गीता जी के जन्मस्थल कुरुक्षेत्र, जो कर्म और धर्म के वास्तविक ज्ञान का स्थल भी है, इस बार उक्त संस्था द्वारा आयोजित 501 हवन कुण्ड वाले इस पवित्र एवं ऐतिहासिक लक्षचंडी महायज्ञ का साक्षी बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि महायज्ञ में अंतराष्ट्रीय वैज्ञानिकों तथा डॉक्टरों के समूह, देश भर के संस्कृति और विज्ञान के क्षेत्र के अनेकों छात्र तथा शोधकर्ता भी अपने शोध हेतु इस महायज्ञ में भागीदारी कर रहे हैं।

संजीव घारू ने कहा कि इस महायज्ञ का तथा वैश्विक स्तर पर हमारे सनातन हिन्दू धर्म तथा संस्कृति का गौरव बढ़ेगा। इस महायज्ञ से आज समग्र विश्व मीडिया के माध्यम से वैदिक सनातन धर्म की शक्ति से परिचित होने को आतुर है।

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