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August 1, 2021

कॅप्टन के मन में कसक, पंजाब की राजनीति में देखने को मिल सकता है बड़ा उलटफेर!

नई दिल्ली. स्टारलोकप्रवाह, वरुण तिवारी, अगले वर्ष 2022  में उत्तर प्रदेश, पंजाब, समेत अन्य राज्यों में विधानसभा का चुनाव होना है। जिसके मद्देनज़र सभी राजनैतिक पार्टियों ने चुनावी राज्यों में चहल कदमी तेज कर दी है। बीजेपी और कांग्रेस के अलावा अन्य क्षेत्रीय पार्टियां भी इन चुनावों में अपने भाग्य आजमाने को तैयार हैं विजय श्री किसको मिलेगी यह बाद की बात है। लेकिन उससे पहले 2022 में होने वाले विधान सभा चुनाव के मद्देनज़र इन प्रदेशों में हो क्या रहा है यह देखना लाज़मी हो गया है।
मजे की बात यह है कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपना ध्यान उत्तर प्रदेश की तरफ केंद्रित करना शुरू किया तो पंजाब हाथ से निकलने लगा है। हाँ यह अलग बात है कि सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर पार्टी को टूटने से बचाने का आलाकमान ने प्रयास किया है लेकिन सोनिया गाँधी का यह प्रयास सफल होता नज़र नहीं आ रहा है। बल्कि इससे पार्टी के अंदर बगावत के सुर और तेज हो गए हैं अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि कांग्रेस के अंदर कॅप्टन बनाम सिद्धू के दो धड़ खुलकर आमने सामने आ गए हैं। मजे की बात यह है कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान हासिल कर नवजोत सिंह सिद्धू पहले राउंड की लड़ाई तो जीत गये हैं। लेकिन उन्हें सतर्क रहना होगा क्योंकि कॅप्टन अमरिंदर भी ऐसे चुप नहीं बैठे हैं। सिद्धू को यह नहीं भूलना चाहिए कि फौजी कभी बूढ़ा नहीं होता और उम्र का असर अगर उसके शरीर पर पड़ने भी लग जाये तो भी दुश्मन को पटखनी देने की उसकी क्षमता कभी खत्म नहीं होती। सिद्धू और अमरिंदर में एक बड़ा फर्क यह भी है कि जहां अमरिंदर सिंह भारतीय सेना के फौजी रहे हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अध्यक्ष पद सँभालते समय जिस तरह वह मुख्यमंत्री का नाम लेना भूल गये वह संयोगवश नहीं हो सकता। नवजोत सिंह सिद्धू जब भाजपा में थे तब अमरिंदर उन्हें नेता नहीं कॉमेडियन बताया करते थे और जब वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आये थे तब भी कैप्टन अमरिंदर सिंह सिद्धू को पार्टी में लाने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन उस समय भी पार्टी आलाकमान की चली थी और सिद्धू की कांग्रेस में एंट्री हो गयी थी। यही नहीं कांग्रेस में नये नवेले सिद्धू को पार्टी के अधिवेशन में जब बोलने का मौका दिया गया था तो यह बात भी कप्तान को नागवार गुजरी थी। ऐसे कई मौके आये जब अमरिंदर सिंह की गाँधी परिवार के सामने एक नहीं चली।
अंत समय तक अमरिंदर सिंह कभी सोनिया गांधी को पत्र लिख कर तो कभी अपने धुर विरोधी प्रताप सिंह बाजवा के साथ बैठक कर आलाकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करते रहे लेकिन उनकी एक नहीं चली और सिद्धू को पंजाब कांग्रेस के प्रधान बना दिया गया। यह जो कसक कॅप्टन के मन में है वह एक बड़े तूफ़ान को जन्म दे सकती है, जिससे पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। सिद्धू ने पहले राउंड में अमरिंदर सिंह को हरा दिया। वहीं बात करें उत्तर प्रदेश की तो योगी जैसा दमदार चेहरा किसी के पास नहीं है। दूसरी तरफ यदि कांग्रेस पार्टी प्रियंका गाँधी को उत्तर प्रदेश में सीएम का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ती है तो भी उनके लिए रास्ता आसान नहीं है।

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